सरगुजा। किसानों की मेहनत और जनता के टैक्स से खरीदे गए करोड़ों रुपये के अनाज की बर्बादी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में खराब और अच्छा धान मिलाकर राइस मिलों को बेचने की कोशिश की जा रही है। इससे न केवल सरकारी धन की हानि हो रही है, बल्कि किसानों के परिश्रम का खुला अपमान भी सामने आया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि गोदामों में रखे धान के बड़े हिस्से में खराबी आ चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे छिपाने के लिए खराब और अच्छे अनाज को मिलाकर आगे भेजने का प्रयास कर रहे हैं।
इस लापरवाही के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। वहीं, इस घोटाले का खामियाज़ा आम जनता को भी उठाना पड़ रहा है, क्योंकि यह नुकसान अंततः करदाताओं की जेब से ही पूरा होगा।
इस पूरे प्रकरण में सरगुजा के जिला विपणन अधिकारी (DMO) अरुण विश्वकर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब उनसे इस मामले में जवाब मांगा गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
जानकारों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच की जरूरत है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस गड़बड़ी के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
ग्रामीणों और किसानों में इस घटना को लेकर नाराज़गी है। उनका कहना है कि जब सरकार किसानों के सम्मान की बात करती है, तो ज़मीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही अस्वीकार्य है।
फिलहाल, अधिकारी और नेता दोनों ही इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और लापरवाही की आशंका और गहराती जा रही है।














