सरगुजा जिले में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने के बावजूद करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला उजागर हुआ है।
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने इस संबंध में सरगुजा संभाग के आयुक्त से शिकायत करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार सिन्हा के कार्यकाल में लगभग पांच करोड़ रुपये से अधिक की फर्नीचर खरीदी फर्जी तरीके से की गई। यह खरीद 23 मई 2024 को की गई थी, जबकि उस समय आदर्श आचार संहिता प्रभावी थी। नियमों के अनुसार इस अवधि में किसी भी प्रकार की नई खरीदी या भुगतान की अनुमति नहीं होती।
शिकायतकर्ता के अनुसार, दस्तावेजों के आधार पर फर्नीचर खरीदी के लिए केवल 70 से 85 लाख रुपये की वास्तविक सामग्री का प्रमाण मिला है, जबकि भुगतान कई करोड़ रुपये में किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से भारी भ्रष्टाचार किया गया।
इसी तरह, विज्ञान प्रयोगशाला सामग्री की खरीद में भी 39 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया, जो नियमों के विरुद्ध बताया गया है। इसके अलावा, निःशुल्क साइकिल वितरण योजना के तहत दो करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक की राशि में 5588 साइकिलों की खरीद की गई, जबकि उस अवधि में भी आचार संहिता लागू थी।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी खरीद जेम पोर्टल (GEM Portal) के माध्यम से की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा न करते हुए सीएसआईडीसी (CSIDC) के माध्यम से खरीदी दिखाकर गड़बड़ी की गई है।
परवेज आलम गांधी ने मांग की है कि इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय जांच कर पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना का उदाहरण है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आचार संहिता लागू थी, तब इतने बड़े पैमाने पर खरीद और भुगतान कैसे संभव हुआ?
क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर का संक्षिप्त संस्करण (250 शब्दों तक) भी बना दूँ, जो अख़बार के सिंगल कॉलम में छप सके?














