जटगा | शासकीय नवीन महाविद्यालय जटगा में जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में शामिल हुए जे.बी.डी. कला एवं विज्ञान महाविद्यालय कटघोरा के प्राचार्य प्राध्यापक प्रो. प्यारेलाल आदिले ने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन की जीवनशैली जनजाति समाज को विश्वभर में एक विशिष्ट पहचान देती है। जनजातीय संस्कृति भारत की ऐसी अनमोल विरासत है जो हमें वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करते हुए सम्मान दिलाती है।
उन्होंने कहा कि भारत के मूल दर्शन और ज्ञान परंपरा को समझते हुए हमें अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए। संविधान के प्रावधानों को मजबूती से लागू करते हुए शिक्षा को विकास का मुख्य माध्यम बनाया जाए तभी भारत समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों के स्वागत के साथ की गई। स्वागत की जिम्मेदारी क्रमशः हेमलता यादव, अजय कुमार, पूजा यादव, लक्ष्मी, दुर्गा, तमन्ना, देवेंद्र और किया ने निभाई। इसके बाद प्रो. दिलीप कुजूर ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं अतिथि परिचय प्रस्तुत किया।
स्थानीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जटगा की प्राचार्य श्रीमती तारा सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनहरण अनंत ने कहा कि “लोकतंत्र के वास्तविक जनक जनजाति समाज ही है। हमें उनसे लोकतांत्रिक मूल्यों की सीख लेकर शिक्षा को सकारात्मक रूप में अपनाना चाहिए ताकि भविष्य उज्ज्वल बन सके।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. फिरत राम, सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) ने किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों हेमलता यादव और अजय कुमार ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पुरुषोत्तम सिंह तंवर, अतिथि व्याख्याता तन्मय लोहनी, सौम्या मरावी, सरोज ध्रुवे, शकुनि धनवार, शकुंतला दास, मीनू दीवान एवं कृष्णा तंवर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।














