• Home
  • छत्तीसगढ़
  • रायगढ़ जिला जेल पर उठे सवाल: व्हाट्सएप चैट और पैसों के लेनदेन के दावों से जांच की मांग तेज
Image

रायगढ़ जिला जेल पर उठे सवाल: व्हाट्सएप चैट और पैसों के लेनदेन के दावों से जांच की मांग तेज

रायगढ़। जिला जेल रायगढ़ की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए एक कथित व्हाट्सएप संवाद और उससे जुड़े पैसों के लेनदेन के दावों ने जेल के भीतर सुविधाओं के बदले धनराशि पहुंचाने तथा मोबाइल फोन के संभावित उपयोग को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई निष्कर्ष जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, जेल में बंद एक बंदी के परिजनों ने एक मोबाइल नंबर और उससे जुड़े पैसों के लेनदेन की सत्यता जानने के उद्देश्य से संवाददाता से संपर्क किया। परिजनों का दावा है कि उन्हें जेल के भीतर से संपर्क कर एक विशेष नंबर पर पैसे भेजने के लिए कहा गया था तथा इसके बदले संबंधित बंदी को कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
बताया जाता है कि जांच के दौरान उक्त मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर संबंधित व्यक्ति ने स्वयं को एक बंदी का परिजन बताया और कथित रूप से कहा कि उसके माध्यम से पैसा जेल के भीतर तक पहुंचाया जा सकता है। बातचीत में यह भी दावा किया गया कि एक कर्मचारी, जिन्हें बंदियों और उनके परिजन “बाबा” के नाम से जानते हैं, के माध्यम से राशि संबंधित बंदी तक पहुंचाई जाती है और बदले में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह कि जेल के भीतर बंदियों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं, क्या सुविधाओं के बदले बाहरी माध्यम से पैसों का लेनदेन किया जा रहा है और यदि किसी कर्मचारी का नाम सामने आ रहा है तो उसकी भूमिका क्या है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जिला जेल रायगढ़ पहले से ही विचाराधीन बंदी संजय बघेल की मौत को लेकर उठे सवालों के कारण चर्चा में है। परिजनों द्वारा जेल की परिस्थितियों और बंदियों के साथ व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। नए आरोपों ने इस मांग को और बल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि दावे सही साबित होते हैं तो यह जेल सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर अफवाहों पर भी विराम लगाया जा सकता है।
फिलहाल जिला जेल प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष चुनौती यह है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें। जब तक आरोपों की पुष्टि या खंडन नहीं हो जाता, तब तक जेल की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल बने रहेंगे।

Releated Posts

Raigarh: बी. एस. स्पंज की नई चिमनियों से पहले उठे सवाल: क्या क्षेत्र का पर्यावरण और बोझ सह पाएगा?

28 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले टेंडा-चारमार क्षेत्र की जमीन, आबादी, वन, जलस्रोत और सामाजिक स्थलों का…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

माटी की खुशबू, लोकगीतों की मिठास और छत्तीसगढ़ी अंदाज—लोकरंग की शानदार शाम

साथियो, छत्तीसगढ़ की असली पहचान सिर्फ यहां की हरियाली, नदियां, पहाड़ और जंगल ही नहीं हैं। हमारी पहचान…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

मैग्नेटो मॉल में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ, 360 लोगों ने देखी ‘हनुमान अंश’

रायपुर। राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं से जुड़ा विशेष आयोजन किया गया। वरिष्ठ…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

छत्तीसगढ़ में जनसुनवाई को लेकर सौदा किया जा रहा हैं

BS उद्योग की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले जमीन की वास्तविक स्थिति, आबादी, जलस्रोत, वन सीमा और सामाजिक संस्थानों…

ByByRaipurNow Sep 5, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *