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आठवीं पास सहयोगी को निज सचिव बनाने की सिफारिश, मंत्रालय ने ठुकराई फाइल

सोशल मीडिया में वायरल हुआ पत्र, कांग्रेस ने साधा निशाना

संजय रजक अंबिकापुर। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा अपने करीबी सहयोगी तबरेज आलम को निज सचिव बनाए जाने की सिफारिश को सामान्य प्रशासन विभाग ने अस्वीकार कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हायर सेकेंडरी (12वीं पास) तय है, जबकि तबरेज आलम सिर्फ आठवीं पास हैं।

इस संबंध में विभाग के अवर सचिव मनराखन भौर्य ने 29 अक्टूबर को मंत्री राजेश अग्रवाल को पत्र जारी कर नियुक्ति से इनकार किया। यह पत्र अब सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।

मंत्री ने भेजी थी अनुशंसा, विभाग ने मांगी थी शैक्षणिक जानकारी
अंबिकापुर विधायक एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने करीबी तबरेज आलम को निजी सचिव के रूप में नियुक्त करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र भेजा था। विभाग ने जब तबरेज आलम की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी, तो पता चला कि वे केवल आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं। नियमों के अनुसार यह योग्यता इस पद के लिए पर्याप्त नहीं है।

न्यूनतम योग्यता 12वीं पास मंत्रालय का पत्र स्पष्ट : छत्तीसगढ़ सचिवालय सेवा भर्ती नियम 2012 के तहत, तृतीय श्रेणी के निम्नतम पद के लिए न्यूनतम योग्यता हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण निर्धारित है। अवर सचिव मनराखन भौर्य ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इस अर्हता के अभाव में तबरेज आलम की नियुक्ति संभव नहीं है।

कांग्रेस का तंज डिग्रीधारी सड़कों पर, आठवीं पास को संविदा में नौकरी : पत्र के वायरल होने के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भाजपा ने एक लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन आज डिग्रीधारी युवा सड़कों पर हैं। सरकार संविदा कर्मियों का नियमितीकरण नहीं कर पाई, पर आठवीं पास को नियुक्त करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ‘सुशासन’ का ढोल पीट रही है जबकि बेरोजगारी बढ़ रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी पोस्ट में लिखा भाजपाई मंत्री जी आखिर आठवीं पास तबरेज आलम को ही निज सहायक क्यों बनाना चाहते हैं?

वायरल पत्र से मचा सियासी घमासान : हालांकि यह पत्र 10 दिन पुराना है, लेकिन इसके वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे “योग्यता से ज्यादा नजदीकी की राजनीति” बताया है, जबकि मंत्रालय का पक्ष है कि नियमों के तहत ही निर्णय लिया गया है।

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