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सुरक्षा बलों ने बचे माओवादियों के ठिकानों पर बड़े ऑपरेशन की तैयारी शुरू की

जगदलपुर। प्रदेश सहित बस्तर से सम्पूर्ण नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से सुरक्षा महकमे ने अब 10 विशेष टीमों को तैनात कर लिया है और बचे माओवादियों के खिलाफ काउंटडाउन शुरू कर दिया गया है। तैयारी के मुताबिक यह अभियान दक्षिण बस्तर से आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक समन्वय के साथ चलने का अनुमान है।

आइजी बस्तर ने सुरक्षा बलों की तैयारियों का हवाला देते हुए बताया कि बचे माओवादी कैडरों की संख्या लगभग 200–300 के बीच आंकी जा रही है। इन बड़े कैडरों में देव जी, संग्राम, पापा राव, बारसे देवा और मोस्ट-वांटेड हिडमा जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके ठिकानों पर सूचना भी सुरक्षा एजेंसियों को मिल चुकी है। इस जानकारी के बाद इलाके में सघन खुफिया और क्षेत्र-पकड़ कार्रवाइयों को गति दी गई है।

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार बस्तर संभाग के करीब 50 ऐसे गांव चिन्हित किये गये हैं जहाँ बड़े माओवादियों और उनके केडर्स के छिपे होने की पर्याप्त संकेत-सूचना मिली है। इन गांवों के आस-पास सघन एनकाउंटर-प्रोफाइलिंग और रेकिंग प्लान तैयार किये जा रहे हैं, साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और उनके कष्टों पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

आइजी बस्तर ने स्पष्ट किया कि स्पेशल टीमों का प्राथमिक लक्ष्य नक्सलियों को सरेंडर के लिए प्रेरित करना होगा — सरकार के पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल होने के पैकेज को दोहराते हुए। वहीं, अगर इन बचे हुए नक्सलियों ने सरेंडर नहीं किया तो एनकाउंटर ही अंतिम विकल्प रहेगा, ऐसा भी कहा गया है। सुरक्षा बलों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बन चुका है और मल्टी-स्टेट ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार हो रही है।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अब क्षेत्र में लॉजिस्टिक-तैयारी, गुप्तचर सूचनाओं का सत्यापन तथा नागरिक सहयोग जुटाने पर काम कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों में सूचनाओं के आधार पर लक्षित ऑपरेशन और जगह-जगह छापे शुरू हो सकते हैं। ऑपरेशन के दौरान आम लोगों के जीवन और कृषि-कार्य प्रभावित न हों, इसके विशेष निर्देश दिए गए हैं।

इसी क्रम में आईजी बस्तर सुंदर राज पी ने कहा सरकार की अपील का असर दिख रहा है। जो मुख्यधारा में लौटना चाहेंगे, उन्हें पूरा सहारा और सुरक्षा दी जाएगी। जिनकी आपसी खींचतान दिख रही है, उन पर भी नजर रखी जा रही है। डेडलाइन के पास आ जाने के बाद सरेंडर को बढ़ावा दिया जाएगा; जो नहीं आएंगे, उन्हें कानून के दायरे में रोका जाएगा।

नागरिकों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नजदीकी पुलिस चौकी या राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर दें, ताकि ऑपरेशन नियंत्रित और लक्षित ढंग से संपन्न हो सके। सुरक्षा बलों ने कहा है कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ सशस्त्र लिप्तता को समाप्त करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक इलाके में शांति व विकास सुनिश्चित करना भी है।

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