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भारी विवाद और विरोध के बीच मैनपाट में बॉक्साइट प्लांट को लेकर जनसुनवाई

संजय रजक अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन नगरी मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट प्लांट को लेकर आज जबरदस्त विरोध और तनाव के बीच जनसुनवाई आयोजित की गई। ग्रामीणों ने सुबह से ही पंडाल उखाड़कर विरोध जताया, बाद में भारी पुलिस बल तैनाती के बीच जनसुनवाई कराई गई।

अधिकांश ग्रामीण प्लांट के खिलाफ, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी पहुंचे मौके पर: जनसुनवाई में पहुंचे अधिकांश ग्रामीणों ने प्लांट खुलने का विरोध किया। विरोध को देखते हुए प्रशासन को बड़ी संख्या में पुलिस बल बुलाना पड़ा। जनसुनवाई स्थल पर पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे और उन्होंने भी प्लांट के खिलाफ आवाज उठाई।

टेंट और पंडाल उखाड़कर जताया विरोध, पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई : सुबह जनसुनवाई स्थल पर लगाए गए टेंट और पंडाल को ग्रामीणों ने उखाड़ दिया। इसके बाद प्रशासन के निर्देश पर सैकड़ों जवानों की तैनाती कर जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

सुनील नायक अपर कलेक्टर ने बताया करीब 102 ग्रामीण जनसुनवाई में शामिल हुए। इनमें से अधिकांश ने प्लांट का विरोध किया है। 2 दिसंबर को दोबारा जनसुनवाई होगी, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है।

ग्रामीण बोले— जमीन जाएगी, पेड़ कटेंगे, पर्यटन खत्म होगा :

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट खुलने से हजारों पेड़ कटेंगे, जलस्तर गिर जाएगा, मैनपाट की पर्यटन पहचान खत्म हो जाएगी, कई किसानों के वन अधिकार पट्टे निरस्त कर दिए गए, सरकार पर्यटन बढ़ाने की बात करती है, पर खनन से जंगल उजाड़ रही है।

एक ग्रामीण ने कहा हमारी जमीन छीनी जा रही है, जंगल कटेंगे, पानी खत्म होगा। प्लांट खुला तो मैनपाट बर्बाद हो जाएगा। इसलिए पूरा क्षेत्र इसका विरोध कर रहा है।

जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग के गंभीर आरोप: जनसुनवाई में पहुंचीं रतनी नाग, जिला पंचायत सदस्य (मैनपाट) ने कहा जनसुनवाई की कोई सूचना नहीं दी गई। बहुत से ग्रामीणों को यह तक नहीं पता था कि प्लांट किस चीज का है। ग्रामसभा से पहले ही दबाव में जनसुनवाई करा दी गई।

स्थानीय ग्रामीण देर से पहुंचे, उनकी बातें नहीं सुनी गईं।
सहमति देने वालों में दूसरे क्षेत्र के लोग शामिल थे।
प्रशासन ने यह भी नहीं बताया कि कितने लोगों ने समर्थन या विरोध किया।

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का सरकार पर हमला : अमरजीत भगत ने कहा सरकार एक तरफ पर्यटन बढ़ाने की बात करती है, दूसरी तरफ खदान खोलकर पर्यटन को खत्म कर रही है। कांग्रेस सरकार पर्यटन को मजबूत कर रही थी, लेकिन भाजपा सरकार खदान और प्लांट खोलने में लगी है। उन्होंने जनसुनवाई के दौरान विधायक के खिलाफ हुई नारेबाजी पर भी टिप्पणी की।

विवादों से घिरी रही जनसुनवाई: यूं तो प्रशासन ने विवादों व विरोध के बीच जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली, मगर पारदर्शिता पर सवाल, स्थानीयों की अनदेखी, जनप्रतिनिधियों पर दबाव डालने के आरोप, ग्रामीणों की बात न सुनने का आरोप,सहमति जुटाने में बाहरी लोगों की भूमिका, जैसे मुद्दों ने जनसुनवाई को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब फैसला सरकार के हाथ — क्या जनता की सुनवाई होगी?

ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि वे किसी भी कीमत पर प्लांट नहीं चाहते।
अब सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार जनता की सुनवाई कर बॉक्साइट प्लांट पर रोक लगाएगी, या फिर उद्योगपतियों और पहुंच वाले लोगों के दबाव में प्लांट को मंजूरी दी जाएगी? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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