कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत रानीडोंगरी–गावडेपारा के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया, जो असल में शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी थी। दुमहान नदी पर पुल निर्माण के लिए ग्रामीण पिछले 15 वर्षों से आवेदन, ज्ञापन, सुशासन तिहार और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाते रहे, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। अंततः ग्रामीणों ने चंदा कर खुद ही अस्थायी रपटा बना लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि हर घर से दो-दो हजार रुपए जुटाए गए। इसके बाद ट्रैक्टर, जेसीबी और तीन दिन की सामूहिक मेहनत से नदी पर अस्थायी रपटा तैयार किया गया, ताकि बरसात के दिनों में आवागमन बाधित न हो। यही उनकी “विकास योजना” बन गई।
बरसात के मौसम में दुमहान नदी उफान पर रहती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल जाने और ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी। कई बार हादसे की आशंका भी बनी रहती थी, लेकिन प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सवाल यह है कि क्या यही सुशासन है, जहां बच्चों की पढ़ाई और लोगों की जान की कीमत पर प्रशासन चैन की नींद सोता रहे? मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान दिया गया आवेदन भी अगर असरहीन रहा, तो विकास के दावे आखिर किसके लिए हैं? ग्रामीणों का जनसहयोग भले ही प्रेरक हो, लेकिन यह सरकार और प्रशासन की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण भी है।














