रायपुर। भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर कोतवाली चौक स्थित अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स (ए.टी. पैलेस) में गुरुवार को “जोहार जगन्नाथ” अभियान का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भगवान जगन्नाथ के मनोकामना रथ को हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना की गई।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि “जोहार जगन्नाथ” केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और जनभागीदारी का अभियान है। उन्होंने कहा कि मनोकामना रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भगवान के श्रीचरणों तक पहुंचेंगी तथा पुरी धाम से लाया गया महाप्रसाद जन-जन तक पहुंचेगा। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इस पहल को समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने वाला प्रयास बताया।
कार्यक्रम में चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया, उनकी धर्मपत्नी मंजू बरड़िया, बरड़िया परिवार तथा संस्था के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूजा-अर्चना एवं महाआरती कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद आयोजित मीडिया संवाद में संस्था के पदाधिकारियों ने “जोहार जगन्नाथ” अभियान के उद्देश्य, सामाजिक पहल और ज्वेलरी उद्योग की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की।
चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया ने बताया कि वर्ष 1957 में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दिन स्थापित अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स अब अपने 70वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि संस्था व्यापार के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। “जोहार जगन्नाथ” अभियान का उद्देश्य हर श्रद्धालु को भगवान जगन्नाथ से जोड़ना और उनकी मनोकामनाओं को प्रभु तक पहुंचाना है।
डायरेक्टर नितिन बरड़िया ने कहा कि बदलते समय के साथ ज्वेलरी उद्योग में गुणवत्ता, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और नए डिजाइनों का महत्व लगातार बढ़ा है। भारतीय आभूषण उद्योग वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
डायरेक्टर निकेश बरड़िया ने बताया कि 9 से 16 जुलाई तक श्रद्धालु ए.टी. पैलेस पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं लिखकर भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर सकेंगे। इस दौरान प्रतिदिन पुरी धाम से लाए गए महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 70वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए रील प्रतियोगिता भी आयोजित की गई है। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः ₹15 हजार, ₹11 हजार और ₹5,100 के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।















