संजय रजक । अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन शुरुआत से ही समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल का असर धान खरीदी केंद्रों में साफ दिखने लगा है। चार सूत्रीय मांगों के समर्थन में कर्मचारी लगातार हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के कारण कई समितियों में खरीदी का काम ठप पड़ गया है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार शुरुआत में ही किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। टोकन कटवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं कई धान खरीदी केंद्रों में किसान नहीं पहुंच रहे, जिससे केंद्रों में सन्नाटा पसरा है। कई किसान धान बेचने के लिए भटकते दिखाई दिए और समय पर काम नहीं होने से परेशान भी नजर आए।
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति नमना–सरगवां धान खरीदी केंद्र में 15 नवंबर को जिला कलेक्टर ने किसानों को फूलमाला पहनाकर 8 क्विंटल धान की खरीदी कर औपचारिक शुरुआत की थी। हालांकि दो दिन बीतने के बाद भी केंद्र में अब तक सिर्फ आठ क्विंटल धान ही पहुंच पाया है। 11 किसानों ने टोकन ले लिया है, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उन्हें खरीदी में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
13 नवंबर से चार सूत्रीय मांगों को लेकर समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। समिति प्रबंधकों का कहना है कि धान का समय पर उठाव न होने से सुखत होने पर कार्रवाई उन्हीं पर होती है, रिकवरी व FIR तक दर्ज कर दी जाती है। वहीं कंप्यूटर ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि सालभर काम करने के बावजूद इस बार सिर्फ छह महीने काम और छह महीने के मानदेय की बात कही गई है, जिससे वे आर्थिक संकट में आ जाएंगे। कर्मचारियों का दावा है कि उनकी जायज मांगों को किसान भी समर्थन दे रहे हैं।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन धान खरीदी व्यवस्था को बेहतर बताने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आ रही है। हड़ताल के कारण कई केंद्रों में खरीदी ठप है और सन्नाटा पसरा हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन कब तक कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय लेता है और धान खरीदी की रफ्तार कब पटरी पर लौटती है।














