अंबिकापुर | जिला अधिवक्ता संघ सरगुजा के आह्वान पर चल रहा अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शनिवार को भी जारी रहा। हड़ताल के दौरान संघ की एक निरीक्षण टीम न्यायालय परिसर पहुंची, जहां हड़ताल अवधि में न्यायिक कार्य कर रहे व्यक्तियों की पहचान की जा रही थी।
संघ ने आरोप लगाया है कि निरीक्षण के दौरान पुलिस, तहसीलदार कार्यालय और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारी न्यायालय परिसर में मौजूद थे और अधिवक्ताओं पर झूठे आरोप लगाने का षड्यंत्र रच रहे थे। अधिवक्ता संघ के अनुसार, इन अधिकारियों द्वारा यह भ्रामक प्रचार किया गया कि अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर की बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त की है, जबकि यह पूरी तरह निराधार और अधिवक्ताओं की छवि धूमिल करने का प्रयास है।
संघ ने बताया कि 7 नवंबर को न्यायिक प्रशासन ने संघ पदाधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर हड़ताल समाप्त करने का दबाव बनाया था। जब संघ ने अपने रुख पर अडिग रहते हुए कहा कि न्यायालय भवन का निर्माण वर्तमान स्थल पर ही होना चाहिए, तब प्रशासन की ओर से यह झूठा विवाद खड़ा कर अधिवक्ताओं को मानसिक रूप से दबाव में लाने की कोशिश की गई।
अधिवक्ता संघ ने इस पूरे प्रकरण की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा ऐसे भ्रामक अभियानों या झूठे प्रकरणों के माध्यम से आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई, तो अधिवक्ता समुदाय और उग्र आंदोलन करने पर विवश होगा।
संघ ने दोहराया कि न्यायालय भवन का निर्माण वर्तमान स्थल पर ही जनहित में उचित है, और जब तक शासन-प्रशासन की ओर से इस पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन जारी रहेगा।














