रायपुर | राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में मंगलवार को कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से “प्रथम IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन — डेटा साइंस एंड इंटेलिजेंट नेटवर्क कंप्यूटिंग (ICDSINC 2025)” का शुभारंभ हुआ। यह सम्मेलन 9 से 11 दिसंबर तक तीन दिवसीय आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. जी. एस. तोमर, चेयरपर्सन, IEEE MP सेक्शन एवं डॉ. सोमित्र सनाढ्य, निदेशक, C3iHUB, IIT कानपुर रहे। कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं रजिस्ट्रार डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे तथा सम्मेलन के चेयरमैन और विभागाध्यक्ष (प्रभारी) डॉ. प्रदीप सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन समिति में प्रो. नरेश कुमार नागवानी, डॉ. आकांक्षा शराफ, डॉ. नितेश के. भारद्वाज और डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी सम्मिलित हैं। सम्मेलन को ANRF, DRDO और NexTechno Gen Pvt. Ltd. का सहयोग प्राप्त हुआ है।
दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत स्वागत भाषण में डॉ. आकांक्षा शराफ ने अंतरराष्ट्रीय सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त की और एआई-चालित स्वायत्त प्रणालियों की बढ़ती महत्ता पर प्रकाश डाला।
डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि सम्मेलन को 100 से अधिक उच्च-स्तरीय शोधपत्र प्राप्त हुए हैं। उन्होंने मेटाडेटा और मल्टीमॉडल डेटा के महत्व पर बल दिया।
प्रो. नरेश नागवानी ने युवा शोधकर्ताओं को बुनियादी शोध प्रश्नों पर कार्य करने हेतु प्रेरित किया, वहीं रजिस्ट्रार डॉ. नरेंद्र लोंढे ने डिजिटल तकनीकों को “डिसरप्टिव” बताते हुए कहा कि एआई इंजीनियरिंग आज की प्रगति का केंद्र बन चुकी है।
निदेशक प्रो. रमना राव ने कहा कि यह सम्मेलन एनआईटी रायपुर के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने ट्रैफिक प्रबंधन, हेल्थकेयर, फिनटेक और फ्रॉड डिटेक्शन जैसे क्षेत्रों में इंटेलिजेंट सिस्टम्स की अहमियत बताते हुए डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को बड़ी चुनौती बताया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. सोमित्र सनाढ्य ने तेजी से विकसित होती एआई तकनीकों के दोहरे प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने “वाइब कोडिंग” और “वाइब हैकिंग” जैसे उभरते साइबर खतरों का उल्लेख किया, जिनमें एआई प्राकृतिक भाषा के निर्देशों के आधार पर साइबरअटैक तैयार कर सकती है।
ऑनलाइन संबोधन में डॉ. जी. एस. तोमर ने कहा कि सम्मेलन शोधकर्ताओं के लिए जर्नल की तुलना में अधिक संवादात्मक मंच प्रदान करता है। उन्होंने सामाजिक समस्याओं की पहचान कर शोध को समाज-उन्मुख बनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में स्मारिका (Souvenir Book) का विमोचन किया गया तथा अतिथियों को मोमेंटो प्रदान किए गए। इस अवसर पर डॉ. नितेश भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
तीन दिवसीय यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उभरती तकनीकों को समझने, बहु-विषयी शोध दृष्टिकोण विकसित करने और वास्तविक समस्याओं के समाधान हेतु प्रेरित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।














