महानदी रिवर बेसिन के लिए CAMP एवं वाटर सेक्टर एक्शन प्लान पर हुई विस्तृत चर्चा
नवा रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर द्वारा 4 दिसंबर 2025 को कंडीशन अस्सेस्मेंट एंड मैनेजमेंट प्लान (CAMP) फॉर महानदी रिवर बेसिन तथा स्टेट स्पेसिफिक एक्शन प्लान फॉर वाटर सेक्टर इन छत्तीसगढ़ विषय पर स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिवनाथ भवन, नवा रायपुर में एनआईटी रायपुर और जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो, सेंटर फॉर महानदी रिवर बेसिन के हेड एवं समन्वयक डॉ. समीर बाजपेई, इंजीनियर-इन-चीफ जे. आर. भगत, तथा चीफ इंजीनियर के. एस. गुरुवर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साथ ही डॉ. इश्तियाक अहमद, डॉ. विकास कुमार विद्यार्थी, डॉ. संदीप सोनी, डॉ. शशिकांत वर्मा, डॉ. अमित कुमार शुक्ला, डॉ. क्षितिज उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. समीर बाजपेई ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सेंटर फॉर महानदी रिवर बेसिन की गतिविधियों, शोध कार्यों और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।
इसके बाद डॉ. संदीप सोनी ने महानदी की अविरल धारा बनाए रखने हेतु सेंटर द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि नदी के निर्बाध प्रवाह के लिए वैज्ञानिक आकलन और बहुआयामी कार्यवाही आवश्यक है, जिस दिशा में केंद्र निरंतर कार्य कर रहा है।
इसी क्रम में डॉ. क्षितिज उपाध्याय ने ‘निर्मल धारा’ कार्यक्रम के भावी रोडमैप की जानकारी देते हुए बताया कि महानदी के जल और नदी तंत्र को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए विभिन्न विभागों और हितधारकों के सहयोग से समन्वित पहलें की जाएँगी।
वहीं डॉ. शशिकांत वर्मा ने स्टेट स्पेसिफिक एक्शन प्लान फॉर वाटर सेक्टर की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत महानदी के साथ-साथ नर्मदा, गंगा, गोदावरी और ब्राह्मणी नदी तंत्रों का भी गहन अध्ययन होगा। इसमें सतही व भूमिगत जल, कृषि, मछलीपालन और अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव का वैज्ञानिक विश्लेषण शामिल है।
अंत में कार्यक्रम में मौजूद सभी विभागीय प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे अपने क्षेत्रों से जुड़े जल संबंधी मुद्दों, चुनौतियों और सुझावों को साझा करें, जिससे समग्र समाधान तैयार किया जा सके।














