चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। पहली बार एक छोटे प्रॉस्थेटिक आई चिप को उन मरीजों की आंख में लगाया गया है, जो अवयवजन्य (irreversible) उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन (Age-related Macular Degeneration – AMD) से पीड़ित थे। इस चिप ने उनकी केंद्रीय दृष्टि (central vision) को बहाल करने में मदद की है।
क्या है यह चिप और कैसे काम करती है
यह प्रॉस्थेटिक आई चिप एक अत्यंत छोटा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो रेटिना (Retina) की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के स्थान पर काम करता है।
- यह लाइट संकेतों को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलता है।
- दिमाग तक यह सिग्नल पहुंचते हैं, जिससे रोगी केंद्रिय दृष्टि देख सकते हैं।
- चिप का आकार इतना छोटा है कि इसे सुरक्षित रूप से आंख में इम्प्लांट किया जा सकता है।
मरीजों के अनुभव और परिणाम
प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल में, जिन मरीजों को यह चिप लगाया गया, उनमें:
- केंद्रिय दृष्टि बहाल हुई, जिससे चेहरे और वस्तुओं को पहचानना संभव हुआ।
- मरीजों ने बताया कि उनका दैनिक जीवन आसान हो गया है।
- यह दुनिया का पहला ऐसा केस है, जहाँ AMD जैसी अचिकित्सीय स्थिति में केंद्रीय दृष्टि बहाल की गई।
विशेषज्ञों की राय
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गेम-चेंजर तकनीक है। भविष्य में इससे लाखों AMD मरीजों को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों ने आगे कहा कि:
“यह सिर्फ दृष्टि बहाल करने का तरीका नहीं, बल्कि आंखों की दुनिया में नई आशा की किरण है।”
निष्कर्ष
यह मेडिकल ब्रेकथ्रू न केवल AMD रोगियों के जीवन को बदल सकता है, बल्कि बायोनिक और प्रॉस्थेटिक तकनीकों के विकास में भी नई दिशा देगा। चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।



















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