• Home
  • ब्लॉग
  • वेदांता हादसा: मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में किसी पर जिम्मेदारी तय नहीं, केंद्रीय समिति की रिपोर्ट के बाद होगा अंतिम फैसला

वेदांता हादसा: मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में किसी पर जिम्मेदारी तय नहीं, केंद्रीय समिति की रिपोर्ट के बाद होगा अंतिम फैसला

रायगढ़। जिले के वेदांता पावर प्लांट, सिंघीतराई में 14 अप्रैल को हुए भीषण औद्योगिक हादसे में 25 श्रमिकों की जिंदा जलकर मौत के मामले में मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में घटना का विस्तृत विवरण तो दिया गया है, लेकिन किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय नहीं की गई है। अब अंतिम निष्कर्ष केंद्र सरकार द्वारा गठित तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा।
मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष प्रस्तुत की गई है। इसमें बताया गया है कि घटना के दौरान बॉयलर में तकनीकी खराबी के कारण फ्लैश टैंक के भीतर प्रेशर अचानक बढ़ गया। जला हुआ कोयला अंदर जमा होने से अत्यधिक ताप उत्पन्न हुआ, जिसका असर चैन डैम्पर के 14 कम्पार्टमेंट पर पड़ा। इनमें से एक कम्पार्टमेंट फट गया, जिससे तेज गति से आग और गर्म राख बाहर निकली तथा कुछ ही क्षणों में श्रमिक उसकी चपेट में आ गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला कलेक्टर के निर्देश पर हुई मजिस्ट्रियल जांच केवल घटनाक्रम का दस्तावेजी विवरण है। जांच अधिकारी एसडीएम विनय कुमार कश्यप ने किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि बॉयलर इंस्पेक्टर और तकनीकी विशेषज्ञ अपनी स्वतंत्र जांच पूरी कर चुके हैं, जबकि अंतिम तकनीकी रिपोर्ट केंद्र सरकार की समिति के अधीन तैयार की जा रही है।
हादसे के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गैर इरादतन मृत्यु, लापरवाही और सामूहिक अपराध से जुड़े प्रकरण दर्ज किए थे। मामले में कंपनी के चेयरमैन, प्रबंधकों और विभिन्न विभागों के प्रमुखों सहित कई अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।
चार कंपनियों के कर्मचारी बने हादसे का शिकार
जांच में सामने आया कि हादसे की चपेट में एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी आए थे। इनमें इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन, पावरटेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, बॉयलर एंड टेक्स इंडिया लिमिटेड तथा डीएसएम के कर्मचारी शामिल थे। हादसे में सर्वाधिक 14 श्रमिक एक कंपनी के थे, जबकि अन्य कंपनियों के कई कर्मचारी भी मारे गए और कुछ घायल हुए।
मुआवजे की स्थिति स्पष्ट नहीं
हादसे के बाद कंपनी की ओर से मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये, केंद्र सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की गई थी। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सभी प्रभावित परिवारों को घोषित मुआवजा पूरी तरह मिला है या नहीं।
यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार की तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर हादसे की वास्तविक जिम्मेदारी और आगे की कानूनी कार्रवाई तय होने की संभावना है।

Releated Posts

जब सवाल धर्म का नहीं, भविष्य का हो—तो सत्ता को जवाब देना पड़ता है

कभी-कभी लोकतंत्र में एक तस्वीर हजार भाषणों से ज्यादा ताकतवर होती है। छात्रों का आंदोलन और उसके बीच…

ByByRaipurNow Jul 25, 2026

सड़क–पानी और अवैध प्लाटिंग को लेकर कांग्रेस का, प्रदर्शन ग्रामीणों संग हाईवे पर उतरे कार्यकर्ता, समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

अंबिकापुर। सड़क, पेयजल समस्या, अवैध प्लाटिंग और गांव में हो रही ब्लास्टिंग पर रोक लगाने की मांग को…

ByByRaipurNow Feb 17, 2026

जब शासन ही कानून तोड़ने लगे

रायगढ़ जिले के तमनार में महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई बर्बरता केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता पर…

ByByRaipurNow Jan 8, 2026

सोनिया गांधी वोटर आईडी मामले पर बोले—‘दूध का दूध, पानी का पानी होगा

मतदाता सूची शुद्धीकरण जरूरी: बृजमोहन अग्रवाल नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मतदाता सूची का…

ByByRaipurNow Dec 9, 2025

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *