रायपुर।
रायपुर के पूर्व सैनिक एस. देवराजू ने श्री नारायणा हॉस्पिटल, देवेंद्र नगर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजना खे्मका अग्रवाल पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही (medical negligence) का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक साधारण सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) के बाद डॉक्टरों की अनदेखी और समय पर जांच न होने के कारण उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई।
क्या है मामला
देवराजू ने बताया कि उनकी पत्नी को 5 अक्टूबर 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
7 अक्टूबर को गर्भाशय-उच्छेदन (Hysterectomy) की सर्जरी की गई, जिसे डॉक्टरों ने “सफल” बताया।
लेकिन दो दिन बाद मरीज को तेज पेट दर्द, सूजन और पसीना आने की शिकायत हुई। परिजनों के लगातार आग्रह के बावजूद इसे “गैस की समस्या” बताकर हल्की दवाइयां दी गईं।
लगातार बिगड़ती रही हालत
10 से 12 अक्टूबर के बीच मरीज की तबीयत लगातार खराब होती गई।
देवराजू का आरोप है कि न तो कोई जांच, एक्स-रे या सीटी स्कैन कराया गया और न ही सर्जन डॉ. खे्मका अस्पताल में मौजूद रहीं — वे केवल फोन पर सलाह दे रही थीं।
13 अक्टूबर को जब स्थिति गंभीर हो गई, तब मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया और आपातकालीन सर्जरी की गई।
जांच में सामने आया कि पहले ऑपरेशन के दौरान आंत में छेद (bowel perforation) हो गया था, जो छह दिनों तक पहचाना ही नहीं गया। इससे पेट में संक्रमण (Peritonitis) और सेप्सिस फैल गया, जिसने धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को प्रभावित किया।
दोबारा ऑपरेशन भी न बचा सका जान
17 अक्टूबर को एक और सर्जरी की गई, लेकिन तब तक संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका था।
सभी चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद, 24 अक्टूबर 2025 को मरीज की मौत हो गई।
देवराजू ने कहा —
“ये सिर्फ एक मेडिकल गलती नहीं, बल्कि एक परिवार की बर्बादी है। अगर समय रहते जांच होती, तो मेरी पत्नी की जान बच सकती थी। डॉक्टर की अनदेखी से वह दर्द में तड़पती रही और आखिरी सांस ली।”
पुलिस में शिकायत और कार्रवाई की मांग
पूर्व सैनिक ने 26 अक्टूबर को देवेंद्र नगर थाना, रायपुर में शिकायत दर्ज कराते हुए अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने,
मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और रिपोर्ट जब्त करने की मांग की है।
उन्होंने राज्य चिकित्सा परिषद से भी डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (disciplinary action) की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी
अब तक अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
परिजनों का कहना है कि वे इस मामले को न्याय की लड़ाई के रूप में आगे बढ़ाएंगे ताकि “ऐसी घटनाएं दोबारा किसी परिवार के साथ न हों।”














