• Home
  • छत्तीसगढ़
  • गारे पेलमा हिंसा के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार : छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन
Image

गारे पेलमा हिंसा के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार : छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

दमनात्मक कार्रवाई बंद कर ग्रामसभाओं के निर्णयों का पालन करे राज्य सरकार
रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल कंपनी को आवंटित गारे पेलमा-1 कोल ब्लॉक की कथित फर्जी पर्यावरणीय जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर CHP चौक, तमनार में जारी शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। संगठन ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, धरना स्थल से ग्रामीणों की गिरफ्तारी और कोयला परिवहन में लगे डंपर से दबकर एक ग्रामीण की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी, जिसके परिणामस्वरूप हिंसक घटनाएं हुईं। आंदोलन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण जनआंदोलनों को कुचलने के लिए हिंसा और पुलिस दमन प्रशासन की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। हसदेव, अमेरा सहित प्रदेश के कई इलाकों में जबरन भूमि अधिग्रहण और जंगलों की अवैध कटाई के लिए पुलिस बल के प्रयोग की घटनाएं इसका उदाहरण हैं।
संगठन का कहना है कि चंद पूंजीपतियों के हित में आदिवासियों और किसानों से उनके आजीविका के संसाधन—जंगल और जमीन—छीने जा रहे हैं। इसके लिए सत्ता और कॉर्पोरेट के गठजोड़ से फर्जी जनसुनवाइयों का आयोजन कराया जा रहा है तथा पेसा कानून और वनाधिकार कानून का उल्लंघन कर संवैधानिक ग्रामसभाओं के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
आंदोलन ने बताया कि गारे पेलमा-1 कोयला खदान से प्रभावित सभी 14 गांवों की ग्रामसभाओं ने परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित कर शासन-प्रशासन को सौंप दिए हैं। इसके बावजूद पहले निरस्त हो चुकी जनसुनवाई को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जबरन दोबारा आयोजित किया गया।
दिनांक 8 दिसंबर को हजारों ग्रामीण धौराभाटा हाई स्कूल मैदान में जनसुनवाई का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए थे, लेकिन जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने निर्धारित स्थल के बजाय दूसरी जगह सीमित लोगों की मौजूदगी में जनसुनवाई की औपचारिकता पूरी कर ली। भारी पुलिस बल के कारण ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को वहां पहुंचने से रोका गया।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने आरोप लगाया कि बीते करीब 15 दिनों से ग्रामीण शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर कोई पहल नहीं की। इससे स्पष्ट है कि सरकार को आदिवासी-किसानों के अधिकारों से अधिक कॉर्पोरेट मुनाफे की चिंता है।
संगठन ने धरना स्थल पर की गई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि फर्जी और अवैध पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए, दमनात्मक कार्रवाइयों को रोका जाए और संवैधानिक ग्रामसभाओं के निर्णयों का सम्मान किया जाए।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति, जिला किसान संघ राजनांदगांव सहित विभिन्न जनसंगठन

Releated Posts

अदाणी फाउंडेशन ने तिल्दा ब्लॉक में 4000 से अधिक विद्यार्थियों को वितरित किए स्कूल बैग

अदाणी पावर लिमिटेड के आसपास के 16 गांवों के 41 शासकीय विद्यालयों को किया गया शामिल इस अभियान…

ByByRaipurNow Jul 28, 2026

भू-माफिया प्रकरण में बड़ा खुलासा: सत्र न्यायालय ने खात्मा आदेश किया निरस्त, एसपी जांच में भी थाना प्रभारीअविनाश सिंह की विवेचना पर सवाल

रायपुर। तिल्दा-नेवरा के बहुचर्चित भूमि फर्जीवाड़ा प्रकरण में सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए थाना तिल्दा-नेवरा द्वारा…

ByByRaipurNow Jul 26, 2026

टीएलपीएस रिपोर्ट से सामने आईं कक्षा शिक्षण की चुनौतियां, बुनियादी अधिगम सुधारने पर जोर

रायपुर। प्रदेश में बुनियादी अधिगम (फाउंडेशनल लर्निंग) को मजबूत बनाने की दिशा में शनिवार को राजधानी रायपुर स्थित…

ByByRaipurNow Jul 18, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *