• Home
  • छत्तीसगढ़
  • सड़क न होने से गर्भवती को झेलगी पर 3 किमी ले जाना पड़ा, सरगुजा में सिस्टम की पोल खुली
Image

सड़क न होने से गर्भवती को झेलगी पर 3 किमी ले जाना पड़ा, सरगुजा में सिस्टम की पोल खुली

सड़क न होने से गर्भवती को कांवर में ढोकर 3 KM पैदल लाए परिजन, रास्ते में ही हुई डिलीवरी; सरगुजा में सिस्टम बेनकाब

संजय रजक अंबिकापुर। सरगुजा जिले से एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही उजागर करने वाली तस्वीर सामने आई है। मैनपाट के तराई ग्राम कदनई के आश्रित गांव सुगाझरिया में सड़क के अभाव के कारण गर्भवती महिला ललिता मांझी को परिजन कांवर/झेलगी के सहारे 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक लाए। इसी दौरान प्रसव पीड़ा बढ़ने से महिला की रास्ते में ही डिलीवरी हो गई। बच्चे का आधा शरीर झेलगी में ही बाहर आ चुका था।

परिजनों ने जैसे-तैसे पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पार कर महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाया। सड़क पर पहुंचने के बाद महतारी एक्सप्रेस से उसे CHC शांतिपारा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की मदद से सुरक्षित प्रसव कराया गया। राहत की बात यह है कि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

यह घटना मुख्यमंत्री समेत पांच मंत्रियों वाले सरगुजा संभाग की है, जहां आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव से निकली यह तस्वीर सिस्टम की सच्चाई बयां करती है।

प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में ऐसे 100 से अधिक गांव हैं जहां आज भी सड़क नहीं है। इसका खामियाजा भोले-भाले ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। शहरों की सड़कें चमकाने के लिए बजट तो बनता है, लेकिन जिन गांवों को सड़क की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां के लिए बजट नाममात्र भी नहीं दिया जाता। यह घटना उसी सिस्टम की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।

सरगुजा जिले के कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां ग्राम पंचायत से लेकर मोहल्लों तक पहुंचने के लिए सड़कें मौजूद नहीं हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला मैनपाट विकासखंड के ग्राम कदनई के आश्रित ग्राम सुगाझरिया का है। यहां सड़क न होने के कारण गर्भवती महिला को झेलगी पर लादकर परिजनों को दूर स्थित एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा। रास्ते में ही स्थिति गंभीर हो गई और महिला का बच्चा झेलगी में ही आधा बाहर निकल चुका था। परिजन जैसे-तैसे उसे एंबुलेंस तक लाए और तत्काल बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों की मदद से सफल प्रसव कराया गया। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में शासन-प्रशासन की मूलभूत सुविधाओं को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसे 100 से ज्यादा गांव हैं जहां आज भी सड़कें नहीं बन सकी हैं। इनका खामियाज़ा आदिवासी व ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि शहरों की सड़कें चमकाने पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन गांवों तक पहुंच सड़क बनाने के लिए बजट के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। यह पूरा मामला शासन-प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।

सरगुजा जिले में आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां ग्राम पंचायत से मोहल्लों तक पहुंचने तक के लिए सड़कें मौजूद नहीं हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

Releated Posts

Raigarh: बी. एस. स्पंज की नई चिमनियों से पहले उठे सवाल: क्या क्षेत्र का पर्यावरण और बोझ सह पाएगा?

28 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले टेंडा-चारमार क्षेत्र की जमीन, आबादी, वन, जलस्रोत और सामाजिक स्थलों का…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

माटी की खुशबू, लोकगीतों की मिठास और छत्तीसगढ़ी अंदाज—लोकरंग की शानदार शाम

साथियो, छत्तीसगढ़ की असली पहचान सिर्फ यहां की हरियाली, नदियां, पहाड़ और जंगल ही नहीं हैं। हमारी पहचान…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

मैग्नेटो मॉल में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ, 360 लोगों ने देखी ‘हनुमान अंश’

रायपुर। राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं से जुड़ा विशेष आयोजन किया गया। वरिष्ठ…

ByByRaipurNow Sep 9, 2026

छत्तीसगढ़ में जनसुनवाई को लेकर सौदा किया जा रहा हैं

BS उद्योग की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले जमीन की वास्तविक स्थिति, आबादी, जलस्रोत, वन सीमा और सामाजिक संस्थानों…

ByByRaipurNow Sep 5, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *